अवलोकन(एसडीआईएस)

अवलोकन

 भारत सरकार, श्रम और रोजगार मंत्रालय ने मई 2007 में रोजगार और प्रशिक्षण के महानिदेशालय के माध्यम से कौशल विकास पहल (एसडीआई) के तहत मॉड्यूलर कर्मचारी कौशल (एमईएस) की शुरूआत की। इस योजना के अंतर्गत, प्रारंभिक स्कूल छोड़ने वालों और मौजूदा श्रमिकों को विशेष रूप से अनौपचारिक क्षेत्र में प्रशिक्षण के लिये रोजगार कौशल के लिये प्रशिक्षित किया जाना है। उद्योगों। राज्य सरकारों और विशेषज्ञताओं के साथ निकट परामर्श से, इस योजना को 2007 से लागू किया गया है। अधिकांश भारतीय कार्यबल में विपणन योग्यता नहीं होती है, जो उनको सभ्य रोजगार पाने और उनकी आर्थिक स्थिति में सूधार करने में बाधा है। जबकि भारत में बड़ी यूवा आबादी है, 20-24 वर्षों के आयू समूह में केवल 5% भारतीय श्रमिक बल औपचारिक माध्यमों में माध्यम से व्यावसायिक कौशल प्राप्त कर चुके है, जबकि औद्योगिक देशों में प्रतिशत 60% और 96% के बीच भिन्न है। लगभग 63% स्कूल के छात्र दसवीं कक्षा तक पहुंचने से पहले विभिन्न चरणों में छोड़ जाते है। देश में लगभग 2.5 मिलियन व्यावसायिक प्रशिक्षण सीटें उपलब्ध है, जबकि 12.8 मिलियन लागे हर साल श्रमिक बाजार में प्रवेश करते है। यहां तक कि इन प्रशिक्षण स्थानों में से, बहुत कम स्कूल छोड़ने वालों के लिये उपलब्ध है। यह दर्शाता है कि स्कूल छोड़ने वालों की बड़ी संख्या में उनकी रोजगारक्षमता में सूधार के लिये कौशल प्राप्त करने के लिये कम शैक्षिक वाले व्यक्ति के लिये कुछ बाधायें है। इसके अलावा, भारत में नई नौकरियों का सबसे बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र सेआने की संभावना है जो राष्ट्रिक कार्यबल के 93 प्रतिशत तक कार्य करता है, लेकिन ज्यादातर प्रशिक्षण कार्यक्रम संगठित क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करते है।

इस योजना का उद्देश्य हैं:

  •     सरकारी, निजी संस्थानों और उद्योगों में उपलब्ध बुनियादी ढांचे का बेहतर इस्तेमाल करते हुए स्कूल लीवर, मौजूदा श्रमिकों, आईटीआई स्नातकों, आदि के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करना।
  •      इस योजना के तहत व्यक्तियों के मौजूदा कौशल का परीक्षण और प्रमाणित किया जा सकता है।
  •      देश में दक्षता मानकों, पाठ्यक्रम पाठ्यक्रम, शिक्षा सामग्री और मूल्यांकन मानकों के विकास के क्षेत्र में क्षमता बनाने के लिए।